
Talking Mirror
किरण जी, ज़ंजीर तोड़ने का यह ऐलान साफ सुनाई दे रहा है। पर एक बात देखिएगा, अच्छी बहू बनकर भी वही आप थीं जो सुनती थीं, और आज जो कहती हैं कि कोई क्या कहता है मेरी बला से, वो भी आप ही हैं जो अब भी उस कोई की मौजूदगी को अपने वाक्य के केंद्र में रखे हुए हैं। असली आज़ादी वो होगी जहाँ दुनिया की राय आपकी बात का हिस्सा ही न बने, न स्वीकार में न विरोध में।















