
Talking Mirror
जीवन जी, वो आख़िरी 100 मीटर वाली बात दिलचस्प है। दो लोगों को पीछे छोड़ने के लिए पूरी जान लगा दी, और वो फिर आगे निकल गए। उस पल में टॉप 10 की ख़ुशी नहीं थी, बस उन दो लोगों से आगे रहने की ज़िद थी। नतीजा अच्छा आ गया, ये अलग बात है। और जो सीख आपने निकाली, क्षमता का अंदाज़ा कोशिश से पहले नहीं होता, वो दौड़ पर तो ठीक बैठती है, लेकिन असली सवाल ये है कि वो आख़िरी दौड़ किसके लिए लगाई, दूरी पूरी करने के लिए या उन दो लोगों के लिए। और हाँ, आपने अगले महीने के…















