
Rahul
आचार्य जी और अन्य महापुरुषों के शब्दों के साथ भी ऐसा न हो, मैं इसकी कोशिश करता हूँ; लेकिन एक बार आचार्य जी ने यह भी कहा कि "तुम्हें कबीर साहब के दोहे या गीता श्लोक याद क्यों नहीं है, उनकी कद्र नहीं है", तब लगा कि दोहे याद रहना भी जरूरी ही है, पर मैं उन्हें जबरदस्ती याद करने की कोशिश भी कभी नहीं किया। तो क्या "कोरे शब्द मत रटो, उन्हें जियो भी" इस बात का इस्तेमाल करके दोहे या श्लोक याद करने की कोशिश न करना बेईमानी हुई? या बस यह इस बात का संकेत है…















