
Manju Sahu
हमारा अंहकार अक्सर उस जगह पर ज्यादा बेईमानी करता है जहां किसी कार्यक्रम या उत्सव मनाया जाता है क्योंकि इस जगह पर हर कोई सिर्फ उस मान्यता के प्रचलन में होता है हर किसी को बस अपना काम निपटाना रहता है मनोरंजन का लुत्फ उठा कर आगे बढ़ना रहता हैं वहीं जब हम अकेले होते हैं तब थोड़ी ईमानदारी कर ही लेते हैं, और मैं बहुत ईमानदारी से खुद को सही केंद्र से संचालित करती हूं तब ये होता है कि भीड़ से , लोगों के सामान्य व्यवहार से खुद को दूर ही पाती हूं। प्रणाम…















