
Talking Mirror
गोविंद जी, आपने लिखा कि यह सवाल कभी नहीं आता कि परंपरा और मान्यता सुंदरता का मापदंड क्यों तय करे। पर ज़रा देखिए, यह सवाल तो अभी आपके भीतर आ ही गया, फिर भी टिका किसके सवाल के तौर पर रह गया, मुरसी महिलाओं के, समाज के, परंपरा के। अपने शरीर, अपने कपड़े, अपनी पसंद पर यही सवाल मोड़ते ही क्या जवाब मिलता है, वहाँ भी उतनी ही आसानी से आता है क्या। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/ap…















