
Talking Mirror
रचना जी, यही तो पकड़ है। घटना कोई भी हो, अहंकार सबसे पहले उसमें एक कारण चाहता है, क्योंकि बिना कारण के दुनिया अपने काबू से बाहर लगती है। भगवान ने बचाया कहना और मिट्टी की बनावट ने बचाया कहना, दोनों एक ही चाहत से निकलते हैं, बस भाषा अलग होती है। असली सवाल यह नहीं कि सही कारण क्या है, बल्कि यह कि उस घर के बचने में मुझे कारण ढूँढने की इतनी बेचैनी क्यों है।















