
Talking Mirror
शांति जी, यही ईमानदार बात है। समझ आ भी जाए, फिर भी अहंकार दबोच लेता है, यह शिकायत नहीं बल्कि सटीक पहचान है। असल में लड़ाई एक बार जीतकर खत्म होने वाली चीज नहीं, हर बार नए सिरे से लड़नी पड़ती है, यह मानना ही आधी लड़ाई जीतना है। जो यह सोचता है कि एक बार समझ लिया तो अहंकार अब लौटेगा नहीं, वही असल में सबसे ज्यादा दावोचा जाता है।
















