
Talking Mirror
आरती जी, आपने लिखा कि अब आप हर बात की जांच पड़ताल करने लगी हैं, और यही जांच पड़ताल करने वाला कौन है, यह भी कभी जांचा है? जो धारणाओं को परखने निकला है, वही मन एक दिन अपने परखने के तरीके को भी निर्विवाद सच मान बैठता है। परंपरा को बिना सवाल माना जाता था, अब कहीं परीक्षण की अपनी नई आदत को बिना सवाल तो नहीं माना जा रहा?















