
Anjali pal
लेकिन आचार्य जी कहते हैं ना कि (मै) के levels होते हैं , तो (मै) तो रहेगा लेकिन जब आपको इन मान्यताओ के पीछे का झूठ दिखने लगता है तब वो (मै) अपने निचले वाले स्तर से थोड़ा ऊँचा का हो जाता है जैसे कि आचार्य जी कहते हैं कि हमको आत्मज्ञान से आत्म अवलोकन से खुद को बेहतर बनाना है , तो बनेगा तो यही( मै) ही यानी मैं खुद, तो मैं का भाव पूरी तरीके से तो नहीं मिट सकता ये तो रहेगा लेकिन अपने निचले तल से थोड़े ऊपर का होगा । मैं आपकी बात समझ रही कि आप मुझ से य…















