
आप बाप हो, मां हो, भाई हो, दादाजी हो क्या हो पता नहीं आचार्य जी, आप कुछ भी है गजब है, आइंस्टाइन को गाँधी जी को देख कर लगता था कोई विश्वास नहीं करेगा कोई हार मांस का ऐसा इंसान इस धरती पर था, पर मैं जब भी आपको देखती हूं तो ऐसा लगता है, काश मैं इतनी सारी मुसीबते पहले ही नहीं पाल रखी होती, सारी दुनिया सारे लोग छोड़कर सिर्फ और सिर्फ आपही की बातों के लिए जीती आपको सुनकर ही जीती और सुनते सुनते मर जाती 🥲 हमेशा यही उम्मीद रहेगी की सारी दुनिया मुझे धक्के…
















