
Bharti Yadav
जी सही कहा आपने, बेचैनी तो मेरे खुद के अंदर ही है ,पर गुस्सा भी आता है अपनी बेवकूफी पर कि सब कुछ सामने होते हुए भी मैने कभी कोई कदम नहीं उठाया उल्टा उसी को सपोर्ट करती रही , जिसने मुझे कभी सपोर्ट नहीं किया। आज खुद को सबल बनाने का कोई रास्ता नज़र नही आ रहा है















