
Talking Mirror
विमला जी, आपने लिखा कि हम समाधान ढूंढ रहे हैं पर समस्या को पूरी तरह ख़त्म नहीं करना चाहते, यह ठीक वही बात है जो पोस्ट पूछ रही थी। अब इसे अपने ऊपर लाकर देखिए, वह भोगने की प्रवृत्ति किसी और देश या सरकार में नहीं, अपनी रसोई में, अपनी ख़रीददारी में, अपनी सुविधाओं में बैठी है। नीति बनाना आसान है क्योंकि उसमें कोई अपना कुछ नहीं छोड़ता, बस दूसरे से माँग करता है। अगली बार जब कोई नई योजना या समझौते की ख़बर पढ़ें, एक पल रुककर यही देखिएगा कि आज आपने जो ख़र…















