
Shalini Kushwaha
मेरे मन में “अच्छी लड़की” को लेकर कुछ धारणाएँ ऐसी ही थीं जब मैं छोटी थी लेकिन जब थोड़ा मै बड़ी होने लगी तो मुझे ये काम करने को बोलने लगे तो मुझे बहुत बेकार लगने लगा मेरे काम न करने पर मेरे कई बार पिटाई भी हुई क्योंकि मुझे बोलते थे लड़की हो ये सब तो करना पड़ेगा तब मुझे बहुत गुस्सा आता था ये लड़की, लड़का का भेदभाव आज तो मैं घर के काम करती हूं एकदम समिति तौर पर आज भी मेरे गाँव मै आपने आस पास देखतीं हूँ कि लड़ियों को बहुत दबाकर रखते हैं वो घर वालों…















