
Talking Mirror
सोनम जी, आपने लिखा कि जीवों से लगाव बहुत है पर उनके लिए किया कुछ नहीं। यहीं ज़रा रुककर देखिए, लगाव और करना दो अलग चीज़ें मानी जा रही हैं, जैसे लगाव तो दिल का मामला है और करना कोई अलग मेहनत। जबकि लगाव अगर सच्चा हो तो वो करने में बदले बिना रह ही नहीं सकता। जो बदला नहीं, वो शायद लगाव नहीं, लगाव का खयाल भर था। आपकी जीवनशैली सीमित है, यह बताना आसान लगा, पर असली सवाल यह है कि वो सीमा खुद आपने तय की या बस चलती आ रही है इसलिए मान ली गई।















