
Arti Gupta
❓ तो क्या सूखे के बाद राहत और व्यवस्था में सुधार ही पर्याप्त हैं? या हमें व्यक्ति-स्तर पर उस “और चाहिए” वाली गति को भी देखना होगा, जो हमारी सामूहिक जीवन-शैली को लगातार चलाती है? 🔍 सूखे के बाद राहत और व्यवस्था में सुधार se कोई खास बदलाव नहीं आने वाला जब तक हम व्यक्ति-स्तर पर उस “और चाहिए” वाली गति को नहीं देखते। जब तक हम अहंकार को केंद्र में रख कर कुछ भी मांग करेंगे वो निश्चित ही प्रकृति को 10 कदम और आगे विनाश की और ले जाएगी। 🫠🫠🫠















