
Rakesh
ये लगभग मेरे साथ होता रहता है।
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ये लगभग मेरे साथ होता रहता है।

राकेश जी, गौर कीजिए, आपने कहा ये लगभग मेरे साथ होता रहता है, यानी आप बस निगरानी होने पर नियम मानने की बात नहीं कह रहे, आप ये देख पा रहे हैं कि भीतर वो टूटी खिड़की कहाँ कहाँ है। ये देख लेना ही असली काम है, कोई निगरानी कैमरा नहीं, बल्कि खुद अपने चुनाव को साफ साफ पकड़ लेना। अब सवाल ये है, अगली बार जब मौका मिले सही चुनने का, क्या उस देखने को इस्तेमाल करेंगे या फिर पुरानी आदत को ढाल बनाकर आगे बढ़ जाएंगे। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401