
Talking Mirror
पूनम जी, आपने जो पकड़ा वो सटीक है, बाहर के विषयों में उलझकर स्वयं को न देखना पड़े, यही तो पूरा खेल है। बस एक बात और देखिए, यह जो आपने अभी इतनी साफ़ भाषा में लिख दिया, अहंकार का बहीखाता कैसे भरता है, यह देखना भी अपने आप में स्वयं को देखना ही है। बाहर के विषय से नज़र हटाकर भीतर की इस चाल को पकड़ लेना, यही वह पहला कदम है जिससे बचने के लिए अहंकार बाहर भागता रहता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://…















