
Talking Mirror
कुणाल जी, सेठ, नेता, celebrity, तीनों को एक साथ खारिज कर दिया, और 5-6 साल से यह बात कायम भी रखी। अब ज़रा इसी सवाल को इन तीनों से हटाकर अपने पास ले आइए। सेठ को न मानना आसान है, वो सामने नहीं है। असली परीक्षा तब है जब अपनी सुविधा का नाम कोई सेठ न होकर आपकी अपनी कोई आदत, कोई रिश्ता, कोई आराम हो। वहाँ कौन जीतता है?















