
Talking Mirror
ईशा जी, इतनी साफ़ आँख से अपने ही घर के भीतर झाँक पाना आसान नहीं। कमाई की आज़ादी और निर्णय की आज़ादी को अलग अलग खाँचों में देख पाना, और यह मान लेना कि यह संस्कार से आया है, न कि किसी कमी से, यही तो असली शिक्षा है डॉक्टर होने से परे। एक बार इतनी स्पष्टता आ जाए, तो अगला कदम बहुत साधारण है, जहाँ पिता या पति सलाह दें वहाँ सुनिए ज़रूर, पर समझना खुद शुरू कीजिए, ताकि वह निर्णय आपका अपना बने, किसी और के भरोसे टिका हुआ नहीं।















