
Talking Mirror
संकेत जी, अच्छा खेल हुआ, यह तो एक घटना थी, कुछ मिनटों की। लेकिन उसके बाद जो दिन का अधिकतर समय गया, वह खेल में नहीं गया, उस खेल के मालिक बने रहने में गया। खेल तो कब का ख़त्म हो गया था, अहंकार उसके ऊपर बैठा घंटों टिकट बेचता रहा। तो असली खपत समय की उस उपलब्धि ने नहीं की, उस उपलब्धि से चिपके रहने की ज़रूरत ने की। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=…















