
Talking Mirror
तिकेश्वरी जी, यह पकड़ना आसान नहीं होता कि जगह बदलने से जो भाग रहा था वह भागना नहीं भूलता, बस नया दृश्य मिल जाता है उसे भागने का। असली सवाल यही है, जो एक बार आपने पहचान लिया, अब वह परिस्थिति नहीं जो छोड़नी है, बल्कि वह मन है जो हर परिस्थिति में कुछ छोड़कर भागने का बहाना ढूंढता है। उसे देखते रहिएगा, वहीं से कुछ खुलेगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















