
tukeshwar patel
हमारे अंदर बैठे अहंकार को पुराने परंपरा, मान्यताओं, ढर्रे को मानना आसान लगता है l और इसी से एक मानसिक गुलामी बन गई है l और हमारे अंदर एक डर बैठा दिया जाता है l यदि तुम ऐसे नहीं किया तो तुम्हारे साथ अपवित्र घटना घट जाएगा l जिसके डर से व्यक्ती करता है l और धारा से उल्टा बहना तो हमे सिखाया ही नहीं है l कभी सवाल करना समाज ने सिखाया ही नहीं है l सवाल कर दिया तो डाट पड़ेगा वह अलग l















