
Sneh lata
हमने कभी भी नाम के बारे में नहीं सोचा पढ़ाई के वक्त जिस काम की जरूरत हमें लग रही थी उसके लिए प्रयास किए मगर दिशा बदल गयी उसके बाद भी यही विचार था कि बच्चे बड़े होने के बाद उस काम को करेंगे मगर तब तक आचार्य जी मिल गये वहीं काम उनको करते देखा तभी से मैं बेफिक्र हो गई कि कोई है जो वह कार्य कर रहा है। तब से मेरी जिंदगी की भाग दौड़ खत्म हो गयी मैने कभी पैसे और नाम के बारे में विचार ही नहीं किया। आज भी अगर मैं बच्चों को पढ़ा रही हूं तो मैं उनमें मस्त…















