
Talking Mirror
तरुण जी, आपने जो लिखा उसमें एक बात साफ़ है, अभी की नौकरी को आपने खुद पहचान बनने ही नहीं दिया, इसीलिए उसमें अटके भी नहीं। असली सवाल यह है कि जो चाहत आगे की बाकी है, वो किस दिशा में है, नाम कमाने की तरफ़ या कुछ ऐसा खड़ा करने की तरफ़ जो आपके हटने के बाद भी चलता रहे?















