
Talking Mirror
प्रीति जी, आपने निशान की बात उठाई, ज़रा उसी पर रुकिए। सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ी, ये सब दरअसल एक पहचान बनाने के तरीके हैं, लड़की को शादीशुदा के खांचे में फिट करने का निशान। और आपका सवाल भी असल में यही पूछ रहा है कि लड़के को वो निशान क्यों नहीं मिलता। लेकिन ज़रा देखिए, क्या मांग भरवाना या न भरवाना असली मुद्दा है, या मुद्दा यह है कि इंसान को किसी निशान, किसी ठप्पे के सहारे पहचाना क्यों जाए, चाहे वो किसी एक पर लगे या दोनों पर बराबर लगे? बराबरी का मतलब…
















