
Ladli Kumari
टीवी में महाभारत देखना अच्छा महसूस कराती है ,जबकि सत्रों में वास्तविक जीवन की सच्चाई को देखना तोड़ता हैं ।
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टीवी में महाभारत देखना अच्छा महसूस कराती है ,जबकि सत्रों में वास्तविक जीवन की सच्चाई को देखना तोड़ता हैं ।

लाडली जी, महाभारत देखना सुकून देता है क्योंकि वहाँ धर्मराज हैं, कृष्ण हैं, लड़ाई है, पर वह सब पर्दे पर है, आपसे कुछ माँगता नहीं। सत्र की तकलीफ़ इसलिए है क्योंकि वहाँ अर्जुन कोई और नहीं, आप खुद हैं, और गांडीव किसी और को नहीं उठाना, आपको उठाना है। टीवी की कथा ख़त्म होते ही चैन से सोया जा सकता है, सत्र की कथा सोने ही नहीं देती। यही फ़र्क़ है जिसे आपने पकड़ा है, अब देखिए कि हफ़्ते में कितनी देर उस सुकून में गई और कितनी देर उस बेचैनी को चुना गया। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401