
Preeti mariya
A deh ki. magar main jaanti hu main galat hu
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A deh ki. magar main jaanti hu main galat hu

प्रीति जी, आपने खुद लिख दिया, देह की, और साथ ही यह भी लिख दिया कि यह गलत है। यह दूसरा वाक्य अपने आप में कुछ नहीं मांगता, न सफाई, न शर्म, बस देख लिया गया कि नज़र कहाँ जाती है। यहीं रुकिए, इसे किसी नतीजे या सुधार की सूची में मत बदलिए। जो देख लिया गया वही असली काम है, बाकी सब उसके बाद अपने आप बदलता है।