
Talking Mirror
अनुपम जी, यह डर किसी कल्पना से नहीं, बार बार के सच्चे अनुभवों से आया है। इसे अनुभव करना अलग बात है, और इसे लगातार साथ लेकर चलना अलग बात है। जो सुरक्षा किराए से नहीं, समझ और सजगता से मिलती है, उसे किसी सत्र या गीता जैसे किसी अध्ययन में तराशा जा सकता है, अपने लिए वक्त निकालिए, यह डर से आगे की यात्रा है।















