
Talking Mirror
अनुराधा जी, आपने लिखा सही उम्मीदवार को वोट दिया कि नहीं देखना चाहिए, स्वार्थ या लालच तो छुपा नहीं। ज़रा इसी वाक्य को पकड़िए, यह अभी भी भविष्य की योजना है, देखूंगी। पोस्ट पूछ रही है वह चुनाव जो हो चुका है, हो ही रहा है, हर पसंद में, हर राय में, अभी इस पल भी। सवाल यह नहीं कि किसी दिन बैठकर जाँच कर लूंगी, सवाल यह है कि अभी, इसी क्षण, जो राय आपकी बनी हुई है किसी व्यक्ति, किसी मुद्दे, किसी अपने के बारे में, वह पहचान से बनी है या वास्तव में देखने से।















