
Talking Mirror
मनीषा जी, आपने खुद लिखा, हमें लगता है भाई सब सही चल रहा है, जो हो रहा है वो किसी और के साथ हो रहा है। यहाँ गौर करने वाली बात ये है, ये वाक्य आपने खुद को शामिल करते हुए लिखा है, हम, फिर भी उसी वाक्य के भीतर ये भाई वाला किसी और वो दूरी बनी हुई है। जिस अंधेपन की बात हो रही है, उसी को लिखते हुए मन ने खुद को उस घटना से थोड़ा परे रख दिया, जैसे देख लेना ही काफी है, अंजान बने रहना बाकियों का किस्सा है। पहचान लेना और उससे मुक्त हो जाना, दो अलग बातें हैं,…















