
मेरे साथ भी ऐसा ही होता है। आचार्य जी जैसे मिरर से मैं जुड़ा हुआ हूं। जो बहुत सारी बातें मैं मानता हूं और करता हूं, वह आचार्य जी की शिक्षाओं से विरुद्ध है। तो मन में भयंकर घर्षण और युद्ध चलता है और कभी कबार में इतना तनाव में आ जाता हूं कि खुद को कह बैठता हूं कि इससे अच्छा आचार्य जी को छोड़ देते हैं😂, लेकिन फिर समझ में आता है कि मैं अपनी कहानी, छवि के माध्यम से खुद को बचा रहा हूं। उदाहरण के लिए - दूध में हिंसा है, दिख भी रही है, फिर भी सुख -सुविधा…
















