
Ravi
आचार्य जी जो हमें समझा रहे हैं, वो बहुत ही दुर्लभ है, बहुत ही कीमती है। क्योंकि इतने बड़े-बड़े देश, जिसको हम लोग बहुत बड़ा मानते हैं कि बहुत पावर है इनके पास, वो लोग इतना छोटा (जो मुझे लगने लगा है अब सत्रों से जुड़ने के बाद, पहले नहीं पता था) काम नहीं कर पाते हैं। खुद पर सवाल उठाना कि हम लोग ऐसे क्यों हैं, जो लड़ने पे उतारू रहते हैं, संघर्ष में रहते हैं। ये जो हमने समझा है इसकी इतनी कीमत है, बोध की इतनी कीमत है। यह दोनों देश संसाधनों से कितने भर…















