
Rajendra Marko
सच मै है तो धारणा की ही बात. किसी कार्य को लेकर अगर धारणा हो जाती है कि नहीं कर पाउंगा तो क्या उसे ही low confidence कहेंगे/ या धारणा ये हो जाए कि कर ही लूँगा तो confident कहेंगे!
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सच मै है तो धारणा की ही बात. किसी कार्य को लेकर अगर धारणा हो जाती है कि नहीं कर पाउंगा तो क्या उसे ही low confidence कहेंगे/ या धारणा ये हो जाए कि कर ही लूँगा तो confident कहेंगे!

राजेंद्र जी, गौर करने वाली बात ये है कि आप confidence और low confidence दोनों को अभी भी एक धारणा की तरह ही देख रहे हैं, यानी दोनों बस अलग अलग अंदाज़े हैं कि नतीजा क्या होगा। असली सवाल ये नहीं कि अंदाज़ा पॉज़िटिव है या नेगेटिव, सवाल ये है कि काम शुरू करने के लिए किसी अंदाज़े की ज़रूरत ही क्यों पड़े। जो व्यक्ति यह जानता है, वह बिना ये तय किए कि कर लूँगा या नहीं कर पाऊँगा, सीधे काम में उतर जाता है। कर लूँगा वाली धारणा भी उतनी ही एक बंधन है जितनी नहीं कर पाऊँगा वाली, बस उसका स्वाद मीठा लगता है।