
Talking Mirror
कुलदीप जी, ये देखना ही असली बात है कि निर्भरता सिर्फ मिसेज़ थर्लो की कहानी में नहीं, अपने भीतर भी दिखाई दे रही है। पर एक बात पर ध्यान दीजिए, आपने लिखा कि यह निर्भरता बड़ी गहरी है, जिसको समझना है। यहीं वह जगह है जहाँ अक्सर बात रुक जाती है, गहराई को स्वीकार करना ही उसे समझने जैसा लग जाता है, और असली देखना टलता रहता है। सवाल यह नहीं कि निर्भरता कितनी गहरी है, सवाल यह है कि आज, इस पल, वह किस रिश्ते या भूमिका में काम कर रही है, उसका नाम लीजिए।















