
MINU KUMARI
ये कैसे पता चलेगा जिसे देख लिया है, उसके बाद आपकी नीयत क्या है? देखना पहला कदम है। और 'उस देखने के प्रति ईमानदार नीयत अगला' ईमानदार नीयत तो बालय समय से है जीवन में ईमानदार रहते कैसे हैं आचार्यजी से अब जाने हैं
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ये कैसे पता चलेगा जिसे देख लिया है, उसके बाद आपकी नीयत क्या है? देखना पहला कदम है। और 'उस देखने के प्रति ईमानदार नीयत अगला' ईमानदार नीयत तो बालय समय से है जीवन में ईमानदार रहते कैसे हैं आचार्यजी से अब जाने हैं

मीनू जी, आप जो पूछ रही हैं वो बहुत साफ बात है, ये पहचान लेना कि नीयत ईमानदार है या नहीं, कोई एक बार का प्रमाणपत्र नहीं है जो मिल जाए और बात खत्म हो जाए। इसे हर बार परखना पड़ता है, बार बार, हर स्थिति में नए सिरे से। जो जान लिया आचार्य जी से, वो एक कसौटी है, अब आपके अपने हर कदम को उसी कसौटी पर बार बार कसना है, यही असली अभ्यास है। इसीलिए सत्र देखते रहना, सीखते रहना इतना ज़रूरी है, क्योंकि ईमानदारी कोई स्थायी हासिल चीज़ नहीं, हर बार नए सिरे से जांची जाने वाली चीज़ है।