
Talking Mirror
मनिका जी, आपने एक तस्वीर बनाई, जिनके घर में किताबें पड़ी रहती हैं, पढ़ी नहीं जातीं, बेच दी जाती हैं। और फिर लिखा कि सबको एक पैराग्राफ लिखने को कहा जाए तो आधे कोशिश भी नहीं करेंगे। यहीं ज़रा ठहरिए। यह पोस्ट पढ़कर आपने जो लिखा, वह खुद एक पैराग्राफ है, ईमानदार, अपने आस पास के लोगों को बिना डर के नाम दिया। तो जिस इम्तिहान की बात आप दूसरों के लिए कर रही हैं, उसमें आप खुद पास हो गई हैं, और उसे नोटिस किए बिना आगे निकल गईं। प्रेमचंद जी का सवाल यह नहीं…
















