
shyama kumari
पहले तो कामना लेकर ही मूर्ति के सामने जाती थी फिर चाहे जिन मूर्ति के सामने चली जाऊँ अब बस गलती की माफी और आगे की सही दिशा तय करने में उनका याद करना होता है। बाकी मै मंदिरों मे नहीं जाया करती क्यूकि लोगों का कर्मकांड देख कर मूड ही खराब हो जाता है और कुछ समझा सकते नहीं उनका श्रधा पे चोट लगता है।















