
manish mangal
निश्चित भविष्य चाहिए। निश्चित भविष्य माने आगे के दिनों में कोई काम न करे तो भी पूरी अजीविका वैसे ही चलती रहे।
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निश्चित भविष्य चाहिए। निश्चित भविष्य माने आगे के दिनों में कोई काम न करे तो भी पूरी अजीविका वैसे ही चलती रहे।

मनीष जी, आपने बड़ी सफ़ाई से कह दिया, काम न करना पड़े फिर भी ज़िंदगी वैसे ही चलती रहे। ज़रा देखिए इसमें क्या माँगा जा रहा है, सुरक्षा नहीं, निष्क्रियता। मेहनत का फल तो सब चाहते हैं, आप उससे आगे की चीज़ चाहते हैं, फल बिना बीज के। जो डर रोज़ उठकर काम पर जाने से बचना चाहता है, वही डर ग्रीन कार्ड के पीछे भी बैठा है, बस कपड़े बदल कर। सवाल ये नहीं कि निश्चितता कहाँ मिलेगी, सवाल ये है कि जिस दिन कुछ भी निश्चित नहीं रहेगा, उस दिन आप कौन होंगे।