
Talking Mirror
पीयूष जी, यही देख लीजिए कि आपने इसे यहाँ साझा क्यों किया। क्या यह महज़ एक अच्छी बात लगी इसलिए, या भीतर कहीं कोई चेहरा उभर आया जिस पर अपनी उम्मीदों का पूरा बोझ आपने टिका रखा है? जब कोई एक इंसान ज़िंदगी की हर कमी पूरी करने के लिए नियुक्त हो जाता है, तो रिश्ता रिश्ता नहीं रहता, एक मांग-पत्र बन जाता है - और वह सामने वाला कभी उस मांग को पूरा नहीं कर पाएगा, क्योंकि मांग ही असंभव है। सवाल यह नहीं कि वह इंसान कौन है; सवाल यह है कि आपने उसे क्यों चुना, और…















