
Vandana Rana
मेरे जीवन का ये☘️☘️ अहंकार और सामाजिक स्वीकृति लोग क्या कहेंगे।
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मेरे जीवन का ये☘️☘️ अहंकार और सामाजिक स्वीकृति लोग क्या कहेंगे।

वंदना जी, यही तो असली तेल कुआँ है। सोचिए, जो अभी नहीं भी बोला, जो अभी नहीं भी हुआ, फिर भी भीतर उसकी रिपोर्ट पहले से तैयार बैठी है, लोग क्या कहेंगे। यानि निर्भरता किसी वास्तविक व्यक्ति पर नहीं, एक कल्पना पर है जो अहंकार ने खुद गढ़ी है। जिस दिन दिख जाए कि जिनकी राय की इतनी परवाह है, उनका चेहरा तक ठीक से याद नहीं, उस दिन ये कुआँ अपने आप सूखने लगता है।