
Sneha Dhandhania
😃 So true!! Guilty of the same thing
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😃 So true!! Guilty of the same thing

और मैम ये कमेंट देखकर मेरा भ्रम टूटा क्योंकि मुझे लगता रहता था कि आचार्य जी के आस पास रहने वाले इन सब पापी चीजों से मुक्त होंगें। मतलब मैं आचार्य जी को भी मुक्त ही समझती हूं। वो बात अलग है कि आचार्य जी के बार बार बोलने की वजह से सिद्धांत रटा हुआ है कि मुक्ति कोई आखरी बिंदु नहीं होती। मैं भीतर ही भीतर उन्हें महामानव समझती हूं, ताकि उन्हें ऊंचा बैठाकर खुद संघर्ष करने से बच सकूं। गजब।🙂 तभी आचार्य जी बोलते रहते हैं "आप लोग गहराई से लोकधार्मिक हैं।"