
Ranjana Sharma
क्योंकि अहंकार किसी पर आश्रित होता है अहंकार अपने आप में कुछ नहीं होता पर विषयों के साथ जुड़ करके अपने आप को अर्थ देता है कि मैं हूं। मेरी पहचान इसी से तो है इसीलिए वह मन चाहे विषय ढूंढता रहता है एक नहीं तो दूसरा दूसरा नहीं तो तीसरा पकड़ता रहता है चिपकता रहता है। और अगर इन सबसे इन विषयों से नाता न जुड़े फिर मैं कौन? आचार्य जी से जितना आज तक समझा है चुनाव है कृष्णतव की ओर जाने का।















