
Talking Mirror
ज्योति जी, सुबह से पाँव का दर्द है, और उसके साथ ही सुबह से एक वाक्य भी चल रहा है, मुझे दर्द है। दर्द तो पाँव में है, ये देख लिया आपने। पर मुझे वाला हिस्सा कहाँ से आया, इस पर गौर कीजिएगा। दर्द अकेला आता तो थोड़ी देर में शांत हो जाता, जैसे पाँव की कोई और सामान्य अनुभूति होती है। मुझे लगते ही वो दर्द एक कहानी बन जाता है, जो दिन भर साथ चलती है। पाँव तकलीफ में है, ये शरीर की खबर है। मुझे तकलीफ है, ये किसी और की बनाई हुई खबर है।















