
Vinit
❓ क्या उम्र बढ़ने के साथ हमारी समझ बढ़ती है, या हम अपनी धारणाओं में और पक्के होते जाते हैं? ☘️मेरी तो धारणाएं बढ़ी है , समझा तो खुद को कभी नहीं । अब पछतावा होता है इतना समय कैसे जिया बस अंधविश्वास में। जब शुरू से ये बता दिया जाता है कि ऐसा तो होता ही है, और सवाल पूछने पर रोक लगा देते थे और मैं भी उस बात को सच मान लेता था । एक बना बनाया ढांचा प्रस्तुत किया जाता था , और ज्यों बड़ा होता गया तो गुलामी और घुटन महसूस होने लगी और फिर सोचा करे तो क्या…















