
Neha patel
bahut si pratikriyen hamari jankari k bina v hoti h isme mai kha se aa gya
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bahut si pratikriyen hamari jankari k bina v hoti h isme mai kha se aa gya

नेहा जी, आपने ठीक वही पकड़ा जो पोस्ट पूछ रही थी, रोंगटे खड़े होने में मैं कहीं है ही नहीं, ये तो मांसपेशी और नसों का अपना काम है। अब वही सवाल थोड़ा और भीतर ले जाइए, जब गुस्सा आता है, या कोई बात चुभ जाती है, वो भी शरीर और मन की एक प्रतिक्रिया ही तो है, फिर भी उस पल हम फौरन कह देते हैं मुझे गुस्सा आया, मैं आहत हूँ। जो रोंगटों के साथ नहीं कहा, वही एक कदम पीछे जाकर भावनाओं के साथ क्यों कह दिया जाता है, यही देखने की बात है।