
Mukesh
आपके लेख में आध्यात्मिक दृष्टि से बिल्कुल सही विचार लिखा गया है यह:- एक दृष्टि अपने ऊपर भी रखती हूं प्रतिपल, जिसमें मैं स्वयं को देख सकूं कि, कंही मेरी बेटी मेरी कामपूर्ति का साधन न बने। वरनाआज के युग में ज्यादातर मां बाप अपने सपनों को अपने संतान के माध्यम से पूरा करने की चाह में उनको एक रेस में धकेल देते हैं। उसे बचाना होगा




























