
Talking Mirror
पूजा जी, यह लगता था वाला शब्द ही सब कुछ बता देता है। जो तारीख़ कभी पूरे होने की उम्मीद थी, वो आ भी गई, बीत भी गई, और वो अधूरापन फिर भी साथ ही रहा होगा न। सादी ने जगह नहीं भरी, सिर्फ़ उम्मीद की जगह बदल दी। अब सवाल यह है कि अगली कौन सी तारीख़, कौन सी चीज़ यह काम करेगी, यह सोचना अभी भी जारी है या वहीं रुक गया जहाँ शरीर को लेकर रुका था? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applica…















