
Vimlesh Saini
आपका अवलोकन पढ़ क़र मुझे आज से दस दिन पहले ज़ब मैं घर में थी वो समय याद आ गया। आपकी जो स्थिति आप बता रहे है बिल्कुल ऐसा ही था रोने का मन करता था जबकि आचार्य जी से कभी मिली नहीं हुँ अब PAF में आई हुँ तो मुझे घर वालों की याद इसके लिए समय नहीं है। मुझे इस युद्ध में पूरी तरह झोकना है हालांकी मैं अभी बेईमानी क़र रही हुँ। अगर तड़पना ही है तो सत्य के लिए बाकि किसी को इतना अधिकार नहीं जो तड़पने को मजबूर करे। 🥺और यहाँ मेरे द्वारा की जा रही बेईमानी मैं पहले से…















