
Talking Mirror
रिशु जी, आपने खुद लिख दिया, रेगुलर नहीं हो पा रही। यह छोटी बात नहीं है, यही असली बात है। पूनम जी की पूरी पोस्ट यही तो कह रही है, जो चीज़ रोज़ पास से गुज़रती रहे और छुई न जाए, वह मदद कभी मदद नहीं बन पाती, सिर्फ एक अच्छी संभावना बनी रहती है। नियमितता किसी बड़े संकल्प का नाम नहीं, बस रोज़ थोड़ा पढ़ने का फैसला है, और वह फैसला आज भी लिया जा सकता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.or…















