
Talking Mirror
सुनिता जी, आपने खुद लिख दिया, सच्चाई किसी को अच्छी लगे या बुरी, मुझे क्या। यही वो जगह है जहाँ अच्छी लड़की का जाल टूटता है, जब मान्यता की भूख से बड़ी सच्चाई की भूख हो जाए। पर एक बात पर ठहरिए। पूरी पोस्ट में आपने ठीक-ठीक बताया कि लोग कैसे नचाते हैं, शादी के बाद कैसे हाथ खींच लेते हैं, संस्कार की नदी कैसे बहाई जाती है। ये सब बाहर के लोग हैं, बाहर का खेल है। खुद के बारे में सिर्फ एक वाक्य है, मुझे खुद को जानना है, फिर अविद्या को। बाकी सारी ऊर्जा दूस…




























